विश्व शांति और संयुक्त राष्ट्र संघ

शांति मानव जीवन का अभिन्न अंग है, यह जीवन में सभी चीजों से ज्यादा महत्वपूर्ण है। जहाँ जीवन में शांति है वहाँ सुख-समृद्धि सभी कुछ आसानी से प्राप्त हो जाता है। शांति का गुण हमें मैत्री भाव, सद्भावना और निस्वार्थता सिखाता है। यही शांति हमें जीवन के मूल्यवान लक्ष्यों की तरफ प्रेरित करती है। परन्तु पूरे संसार में सारे व्यक्तियों के लिए एक ऐसा समय भी आया था जब सारे संसार में अशान्ति ही अशान्ति का माहौल था। हमने दो विश्व युद्धों का सामना किया। इन दोनों विश्वयुद्धों ने विश्व को इतने कड़वे अनुभव दिए कि एक ऐसा संघ बनाने की आवश्यकता महसूस की जाने लगी, जो पूरे विश्व में शान्ति फैलाए। यह बात सन 1944 में ‘ड्बरटन ओक कांफ्रेंस’ में पहली बार उठाई गई। 26 जून, 1945 को ‘सैन फ्रांसिस्को’ में 51 राष्ट्रों के प्रतिनिधियों के सम्मेलन में इसको अंतिम रूप प्रदान किया गया। इसका निर्माण करने का सुझाव राष्ट्रपति रुजवेल्ट ने दिया। वास्तविक तौर पर 24 अक्टूबर, 1945 को ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ में स्थापित हुआ।
‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ को स्थापित हुए आज लगभग 50 वर्ष बीत गए हैं, इस दौरान विश्व में बहुत बड़ा परिवर्तन आ गया है। परमाणु बम आदि जैसे विध्वंसकारी शस्त्रों का अविष्कार होने के कारण मानव जाति विनाश के कगार पर खड़ी हो गई है। शुरुआत के समय में केवल 51 देश ही संयुक्त राष्ट में शामिल थे जो अब बढकर 188 हो गए हैं। पिछले पचास वर्षों में अर्थव्यवस्था का क्षेत्र भी बड़ा हो गया है। विज्ञान और तकनीकी में उन्नति के कारण मानव जीवन में सुधार आता जा रहा है।

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