मेरे जीवन का मुख्य उद्देश्य

यथार्थ रूप से यदि हम जीवन को समझें तो हम मानेंगे कि जीवन में अपने भौतिक उद्देश्यों की प्राप्ति करने के बाद भी अपने मन को खश करने के लिए एक ऐसी चीज की आवश्यकता होती है जो हमें आनंद दे सके लेकिन हो सकता है कि वह चीज इतनी आदर्शपूर्ण न हो। परन्तु हमार आदर्श भी उसी बात पर निर्भर करता है कि हमें आनंद आ रहा है या नहीं हम बाल्यावस्था से ही संघर्ष करते हैं और जीवनभर किसी न किसी तरह का संघर्ष करते रहते हैं। इस संघर्ष में हमारी बहुत सारी जिम्मेवारियाँ सम्मलित होती है। हमारे उद्देश्य हमारे कर्तव्यों को लेकर बंधे हुए होते हैं। लेकिन पूरा होने के बाद भी उसकी कुछ चाह अधूरी रह जाती है। उसकी कोई न कोई कमजोरी तो होती ही है। जो कमजोरी उसको आंनद देती है जरूरी नहीं कि वह कमजोरी आदर्शपूर्ण हो।
जैसे कि एक फुटबाल का मशहूर खिलाड़ी है वह सारे दिन कठोर परिश्रम करता है, परन्तु घर पर आकर सबसे पहले कमरे में शास्त्रीय संगीत चला देता है, यह उसका आंतरिक आनंद है। जिससे उसकी दिन भर की थकान मिट जाती है और उसकी आत्मा शान्त हो जाती है।
दो प्राणी एक समान नहीं होते। जीवन में लोग जिन तरीकों से सुख प्राप्त करना चाहते हैं, वे एक जैसे नहीं होते। हालांकि यह दृश्य साधनों से लेकर साध्य तक दिखाई देता है। अपने आप स्वभाव तथा बौद्धिक क्षमता के द्वारा अधिकतम सुख प्राप्त करने का यह तरीका तय होता है।
‘झोबौ द ग्रीक’ का कहना है कि “जीवन का प्याला पीने और उससे रोमांच प्राप्त करने का सही तरीका भरपूर शारीरिक सुख प्राप्त करने का है।” वह किसी भाग्यवादी की तरह, अपनी इच्छाओं पर बिना किसी रोक-टोक के सोचता है, और जीता है।

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